शून्य तेल अवधारणा

शून्य तेल अवधारणा

शून्य तेल अवधारणा

जीवनशैली में सबसे आमतौर पर, जो इस आधुनिक युग में अधिकांश लोगों अपनायी है, वह है सुस्त जीवनशैली। बहुत कम लोग नियमित शारीरिक गतिविधियों को करते हैं। हममें से ज्यादातर लोगों की जीवनशैली ऐसी होती है जिनमें कम से कम शारीरिक श्रम, व्यायाम न करना और गलत खान-पान की आदतें हैं जो सुस्त जीवनशैली का परिणाम है।
अब, यह सभी जानते हैं कि वसा कोरोनरी धमनी जैसी धमनियों (रक्त को ले जाने वाली नलियों) में रुकावट पैदा करती है। इस वसा को कोलेस्ट्रॉल अथवा ट्राईग्लिसराॅइड्स कहा जाता है। वे समय के साथ धीरे-धीरे परतों के रूप में जमा होते रहते हैं। जब ये ब्लॉकेज अधिक गंभीर हो जाती है तो नलिकाएं(धमनियां) अवरूद्ध हो जाती हैं जो कोरोनरी आर्टरी डिजीज (एनजाइना, हार्ट अटैक) नामक बीमारी का कारण बन जाती हैं।
पिछले 50 वर्षों में कोलेस्ट्रॉल (पशु वसा) को रुकावटों का एकमात्र अवयव माना जाता था। पिछले एक दशक में ट्राईग्लिसराॅइड्स (पादपीय वसा) को भी ब्लॉकेज उत्पन्न करने में समान रूप से जिम्मेदार पाया गया है। ट्राईग्लिसराॅइड रासायनिक नाम है, जिसे आमतौर पर “खाद्य तेल” के नाम से जाना जाता है। तेल निर्माता कंपनियों ने “कोलेस्ट्रॉल मुक्त” या “शून्य कोलेस्ट्रॉल तेल” जैसे शीर्षक देकर भोले-भाले लोगों को गुमराह करके तेल को हानिरहित होने का विश्वास दिला कर कि अपनी बिक्री को बढ़ाने का प्रयास किया है। हालांकि, यह सच है कि तेल में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है क्योंकि यह पौधों के बीजों से बनता है जबकि कोलेस्ट्रॉल पशु उत्पादों (मांस, दूध और उनके उत्पादों) से आता है। आम आदमी ने इन तेलों को खरीदना शुरू कर दिया। लेकिन वे यह महसूस करने में विफल रहे कि यह तेल भी सौ प्रतिशत वसा है क्योंकि वे ट्राईग्लिसराॅइड्स हैं और ट्राईग्लिसराॅइड्स समान रूप से हानिकारक होते हैं। तेल में कैलोरी की उच्च मात्रा होती है (प्रत्येक ग्राम में नौ कैलोरी होता है) जिससे मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप होता है। सबसे अच्छा है कि हम भोजन में वसा की मात्रा कम से कम रखें (शरीर द्वारा वसा की अधिकतम आवश्यकता कुल कैलोरी का 10% है)।

यह आसानी से सभी खाद्य पदार्थों से प्राप्त की जा सकती है, क्योंकि प्रत्येक भोजन में तेल होता है जिसे अदृश्य वसा या छिपी हुई वसा कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि वसा के सभी दृश्य स्रोतों (यानी खाना पकाने का तेल) को पूरी तरह से हटा देना जाना चाहिए। अब, यह प्रश्न खड़ा होता है: कि तेल के बिना स्वादिष्ट भोजन कैसे तैयार किया जाए?
क्या तेल के बिना भोजन तैयार किया जाना ठीक रहेगा? क्या उसमें स्वाद होगा? यदि आप तर्कसंगत रूप से सोचते हैं तो उत्तर हाँ में होगा। स्वाद मसालों से आता है। तेल स्वयं स्वाद नहीं जोड़ता है। यह हमारी मानसिकता है, जिस पर वर्षों से विश्वास किया जाता आरहा है, जो कहती है कि स्वाद तेल से आता है। लेकिन जब हम तेल हटाने के लिए कहते हैं तो मसाले अपने आप हट जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गृहिणी को पता नहीं होता है कि बिना तेल के मसाले कैसे डाले जाते हैं। जिसने साओल को “जीरो ऑयल” की अवधारणा विकसित करने के लिए प्रेरित किया। “जीरो ऑयल” से हमारा मतलब है कि तेल की एक भी बूंद का उपयोग किए बिना खाना पकाना। साओल मसालों और भोजन को पानी में पकाता है और चूंकि मसाले वहाँ मौजूद होते हैं, इसलिए रंग, स्वाद और स्वाद बरकरार रहता है।
साओल यह भी महसूस करता है कि लोगों की मानसिकता को खाना पकाने वाले माध्यम के रूप में पानी को स्वीकार करना मुश्किल होता है। इसलिए हमने पानी को “साओल आॅयल” नाम दिया है; जब खाना पकाने के माध्यम के रूप में पानी को इस्तेमाल करते हैं। आपके खाना पकाने में शून्य तेल की अवधारणा को शुरू करने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराॅइड्स लेने का कोई जोखिम नहीं होगा। यह वजन कम करने में भी सहायक होता है, क्योंकि उच्च कैलोरी उपभोग दूर हो जाता है।
हम अब उपयुक्त तौर पर कह सकते हैं कि साओल आॅयल में कोई वसा, कोई कोलेस्ट्रॉल नहीं है, यह 100% खनिज है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।..Please Click Here