ज़ीरो आयल का मतलब उबला हुआ खाना नहीं होता

तेल का कोई स्वाद नहीं होता; फिर भी, लोगों का ऐसा मानना है कि यह स्वाद देता है। क्यों? डॉ छाजेर ने एक गृहिणी से पूछा कि “आप खाने में तेल क्यों डालती हैं”। उस गृहिणी ने इस बात से की तेल का अपना कोई स्वाद नहीं होता, सहमति व्यक्त करने के बाद कहा कि केवल मसाले, प्याज और टमाटर का ही अपना स्वाद होता है। उसने कहा, “तेल के बिना हम मसाले कैसे तलेंगे / पकाएंगे?” डॉ छाजेर ने उनसे पूछा “आपको किसने बताया कि तेल, मसाले भूनने के लिए जरूरी है?” कुछ मिनट सोचने के बाद उसने कहा “मेरी माँ ने”। आपकी माँ को किसने बताया? उसकी माँ….. अंततः वह मान गई कि यह पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है।

तब डॉ छाजेर ने उन्हें समझाया कि उनकी घर की नौकरानी ने डॉ छाजेर को बताया कि वह मसाले को पानी में पकाती /तलती है क्योंकि उसके पास तेल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। उसने डॉ छाजेर को यह भी बताया कि तेल खरीदने के लिए पैसे की कमी के कारण उसके लगभग सभी पड़ोसी भी पानी में ही सब्जी पकाते हैं। डॉ छाजेर ने गृहिणी को यह भी बताया कि उनकी नौकरानी ने एक बार यह भी कहा था कि “अमीर लोग तेल खरीदते ही क्यों है जब उन्हें मसाले भूनने के लिए मुफ्त में पानी मिल सकता है?”

जब वह डॉ छाजेर के “हार्ट केयर कैंप” में शामिल हुईं और साओल के जीरो ऑयल लंच में शामिल हुईं और खाना पकाने के प्रदर्शन में शामिल हुईं तो उन्हें विश्वास हो गया कि स्वाद में कोई अंतर नहीं है – चाहे वह खाना पानी में बना हो या तेल में।

लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे घर भी हैं जहां लोगों को पता नहीं है कि मसाले बिना तेल के भी पकाये जा सकते है। तो, वे अभी भी मानते हैं कि शून्य तेल में खाना पकाने का मतलब है सब्ज़ियों को उबालना और – खाने में कोई स्वाद नहीं रहेगा।

जो लोग अधिक शिक्षित और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक थे, उन्होंने तेलों के सेवन को कम करने की कोशिश की, लेकिन ज़्यादातर लोगों को तेल के दुष्प्रभाव के बारे में पता नहीं था। तेल कंपनियाँ कई तरह के तेलों के साथ आईं और यह दावा करती रही कि उनका तेल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है या अन्य तेलों की तुलना में बेहतर है। उनमें से कुछ ने डॉक्टरों के साथ साजिश रची और अपने ब्रांड के तेल का प्रचार किया। परिणाम यह हुआ कि तेल का उपयोग बढ़ता रहा।

जब कुछ हृदय रोगी डॉक्टरों के पास जाते हैं और उनसे तेल कम करने के लिए कहा जाता है – तो उनमें से कुछ की मात्रा कम हो जाती है, तेल का ब्रांड बदल जाता है लेकिन उनमें से कुछ तेल का सेवन पूरी तरह से रोक देते हैं। अंतिम समूह उबला हुआ भोजन, सब्जियां खाना शुरू कर देता है। वे सभी मसालों को बंद कर देते हैं क्योंकि उन्हें एक समझ थी – कि “शून्य तेल का मतलब उबला हुआ भोजन है”।
यही पर साओल ने कदम रखा। जब हमने महसूस किया कि तेल का कोई स्वाद नहीं है और खाना पकाने के दौरान, अगर हम इसे पूरी तरह से टालते हैं तो हमें मसाला पकाने के लिए एक और खाना पकाने का माध्यम चाहिए। हमने उन संभावित तरीकों पर काम किया जिसमें स्वाद से समझौता नहीं किया जाता है लेकिन तेल नहीं डाला जाता है। हमारे प्रयोग सफल हो गए क्योंकि हमने महसूस किया कि तेल को पानी से आसानी से बदला जा सकता है। कुछ साल लग गए लेकिन धीरे-धीरे हम बिना तेल के भी उतनी ही स्वादिष्ट करी बना सकते हैं। हम वर्षों में 1000 से अधिक व्यंजनों का निर्माण करने में सक्षम थे। आपको साओल के यूट्यूब चैनल पर जाना चाहिए और उस तरीके को देखना चाहिए जिसमें हम सब्जियों को पानी से पकाते हैं।

आशा है आपको यह लेख पसंद आया होगा!

अधिक स्वास्थ्य संबंधी ब्लॉग के लिए, कृपया लिंक पर क्लिक करें।

हमारी वेबसाइट पर जाने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें। फेसबुक पर हमसे जुड़ने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें।