हृदय रोग विकास के कारक।

हृदय रोग विकास के कारक।


कोरोनरी हार्ट डिज़ीज़ (सीएचडी) या कोरोनरी आर्टरी
डिज़ीज़ (सीएडी) या इस्कीमिक हार्ट डिज़ीज़ (आईएचडी) दुनिया भर में रुग्णता तथा मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक है। यह रक्त वाहिकाओं (हृदय को रक्त आपूर्ति करने वाली कोरोनरी धमनियां) की आंतरिक चिकनी सतह पर कोलेस्ट्रॉल और वसा के जमाव होता है, जिसके परिणामस्वरूप कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह में रुकावट होती है।
कुछ अवस्थाओं, जीवनशैली की आदतों को चिन्हित कर आलेखित किया गया है जो रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल और वसा के जमाव के लिए तथा साथ-साथ ही बढ़ी हुई जमाव दर, जिस दर पर वे जमा हो रहे हैं के लिए भी जिम्मेदार हैं, इन्हें रिस्क फैक्टर कहा जाता है।
रिस्क फैक्टर वे कारण हैं जो कोरोनरी धमनियों में कोलेस्ट्रॉल या वसा के जमाव को गंभीरता से बढ़ाते हैं। वे सभी कारक जो कोरोनरी हार्ट डिज़ीज़ के विकास के लिए अवश्यक हैं, उन्हें 2 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

  1. परिवर्तनीय रिस्क फैक्टर : – इस समूह में वे जोखिम कारक आते हैं जिन्हें बदला जा सकता है और रोका जा सकता है ताकि हृदय रोग की आगे की प्रगति को रोका जा सके।
  2. गैर-परिवर्तनीय रिस्क फैक्टर : – ऐसे तीन जोखिम कारक हैं जिन्हें परिवर्तित नहीं किया जा सकता है जैसे कि आयु, लिंग और आनुवंशिकता।