योग का महत्व

योग भारत में लगभग 500 ईसा पूर्व में विकसित दार्शनिक सिद्धांत है। नैतिक सिद्धांतों, ध्यान तकनीकों और हठ योग नामक एक विशेष प्रकार के शारीरिक प्रशिक्षण के आधार पर, जिसमें आसन और श्वसन पर नियंत्रण शामिल है … यह सही बातचीत, संयोजन, मन और शरीर के समन्वय के बारे में कहा जाता है।

साओल इन पांच अलग-अलग समूहों के अभ्यासों की सलाह देता है।

  1. हृदय कायाकल्प व्यायाम (एच.आर.ई.)
  2. आसन अथवा आराम की मुद्राएं।
  3. प्राणायाम अथवा श्वसन व्यायाम
  4. कायोत्सर्ग अथवा विश्राम
  5. ध्यान: प्रेक्षा ध्यान
  6. नैतिक शिक्षण और अनुप्रेक्षा

प्रशिक्षण और समय: –
योग के दैनिक अभ्यास की कुल अवधि लगभग 40 से 60 मिनट होनी चाहिए। हालाँकि, यदि चाहें तो ध्यान अधिक समय तक भी किया जा सकता है।

नियम और अधिनियम:-

  1. अभ्यास में नियमितता और समय की पाबंदी आवश्यक है।
  2. अभ्यास के लिए निर्धारित समय बनाए रखा जाना चाहिए। इस तरह के अभ्यासों के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि सुबह के समय आँत साफ और पेट खाली होता है।
    कुछ लोगों के लिए, शाम का समय भी उपयुक्त हैं। भोजन और अभ्यास के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर अवश्य होना चाहिए।
  3. यदि किसी को एक कप कॉफी या चाय या दूध की आवश्यकता हो, तो इसे आसन के अभ्यास से आधे घंटे पहले लिया जा सकता है। आसान का अभ्यास करने वाले का आदर्श लक्ष्य चाय और कॉफी को पूरी तरह से रोकना होना चाहिए।
  4. जगह: किसी विघ्न और के शोर के बिना साफ और हवादार जगह व्यायाम और आसन करने के लिए आदर्श होती है।
  5. पोशाक: आरामदायक, ढीली और एक हल्की पोशाक ऐसे अभ्यासों के लिए अच्छी होती है।
  6. नींद: एक वयस्क के लिए रोजाना लगभग 6 से 8 घंटे की नींद आवश्यक है। अगर कोई जल्दी सो जाता है, तो नींद पूरी होना और सुबह जल्दी उठना संभव है। तब और सिर्फ तब ही योग अभ्यास के लिए उचित समय बनाए रखना संभव हो पाता है।
  7. आराम : आसन करते समय यदि व्यक्ति थकान महसूस करे, तो उसे आराम करना चाहिए। कभी भी अपनी क्षमता की सीमाएं न लांघें। आपकी क्षमता धीरे-धीरे बढ़ेगी। आसनों के पूरा होने के बाद पांच मिनट के लिए कायोत्सर्ग (मांसपेशीय विश्राम) आवश्यक है। उसके बाद आसान का अभ्यास किया जा सकता है।