योग के साथ उपवास: तालमेल का अनुभव करें

शरीर, मन के साथ जुड़ा हुआ है और मन भावनाओं के साथ। जब उपवास के माध्यम से शरीर की सफाई की जाती है, तो मन भी शुद्ध होता है। यह शांत, स्पष्ट और शांतिपूर्ण हो जाता है। मन और शरीर का जटिल जुड़ाव, एक नए स्तर के संतुलन और गहराई का अनुभव करता है।
उपवास करते समय, मन और शरीर कुछ बेचैनी से गुजर सकते हैं। लेकिन यह तथ्य कि आपने वास्तव में मनपसंद स्वाद के आगे घुटने नहीं टेके और ना ही भूख के आगे हार मानी, इससे आप अपने बारे में बहुत ही अच्छा महसूस करेंगे। बेचैनी को प्रबंधित किया जा सकता है और उपलब्धि की भावना को बनाये रखा जा सकता है, हल्के योग से, झुकने से और प्राणायाम से।

उपवास करते हुए योग के लाभ

• योग शरीर को डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया से निपटने में मदद करता है और ऊर्जावान बनाता है।
• गहरी सांस लेने और विश्राम के माध्यम से, तनावग्रस्त तंत्रिका को हीलिंग मोड में बदल दिया जाता है।
अपने उपवास में योग शामिल करे।

प्राणायाम

• आँखें बंद करके और सीधे पीठ के साथ एक आरामदायक स्थिति में बैठें।
• एक गहरी सास लो। सांस अंदर लेते हुए, पेट को फैलाने की कोशिश करें।
• कुछ सेकंड के लिए सांस को रोककर रखें।
• नथुने से धीरे-धीरे साँस छोड़ें और पेट को अपनी प्राकृतिक स्थिति में लौटने दें। इस दस से पंद्रह बार अभ्यास करें।
सुझाव: यह सुझाव दिया जाता है कि आप दिन में तीन बार प्राणायाम का अभ्यास करें।

स्पाइनल स्ट्रेच

यह आसन कठोरता और ऊर्जा की किसी भी रुकावट को दूर करके, पूरे शरीर को फिर से सक्रिय करने में मदद करता है।

• वज्रासन में आराम से बैठें और अपनी पीठ को सीधा रखें।
• अपनी हथेलियों को अपने सिर के ऊपर से मिलाएं। अपनी उंगलियों को इंटरलॉक करें और अपनी हथेलियों को ऊपर की ओर करें।
• जब आप सांस लेते हैं, तो अपनी पीठ और हाथों को ऊपर की ओर फैलाएं।
• लगभग दस सेकंड के लिए सांस को रोककर रखें।
• धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपने हाथों को नीचे लाएं।
• तीन बार व्यायाम दोहराएं।