कुछ विटामिनों की कमी

i. विटामिन ए: इस विटामिन की कमी से आंखों की लैक्रिम्मल ग्रंथियों में शोष होता है और आसुँओ के स्राव में कमी हो सकती है। यह नाइटक्लेपिया नामक रात के अंधेपन का कारण हो सकता है। आँखों में पाए जाने वाला कॉर्नियल एपिथेलियम, लाल हो जाता है और सूख जाता है, और इस बीमारी को ज़ेरोसिस कहा जाता है। यह झुर्रीदार और केराटिनाइज़्ड हो सकता है, जिसे ज़ेरोप्टहेल्मिया कहा जाता है। कॉर्निया में, बिटोट स्पॉट भी दिख सकता है। केराटोमेलेशिया भी होता है, जो कि नेक्रोस कॉर्निया का संक्रमण है।

ii. विटामिन बी 1: विटामिन बी 1 की कमी से बेरीबेरी होने का ख़तरा होता है जो तंत्रिका और हृदय प्रणाली को प्रभावित करता है और यह ज्यादातर बच्चों और शिशुओं को होता है।

iii. विटामिन बी 2: विटामिन बी 2 की कमी के कारण भूख न लगना, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण, खराश और जीभ, होंठ और मुंह का जलना जैसी परेशानियां होती है। यह मुंह के किनारों पर दरारें भी पैदा कर सकता है।

iv. विटामिन बी 6: इस विटामिन को पाइरिडोक्सिन भी कहा जाता है और मनुष्यों में इसकी कमी से आंख, नाक और कान के पीछे डर्मेटाइटिस (त्वचा लाल हो जाती है और दर्द होता है) हो जाता है। होंठ के ऊपर और मुंह के कोण पर दरारें दिखाई दे सकती हैं।

v. विटामिन बी 12: रीढ़ की हड्डी से संबंधित एनीमिया, गले की खराश और तंत्रिका संबंधी समस्याएं बी 12 के कारण होती हैं।

vi. विटामिन नियासिन: इसकी कमी से पेलेग्रा होता है जिसके प्रमुख लक्षण जिल्द की सूजन, स्टामाटाइटिस और मनोभ्रंश (मानसिक परिवर्तन) हैं। जीभ चिकनी, लाल और दर्दनाक हो जाती है।

vii. विटामिन सी: इसकी कमी से स्कर्वी रोग होता है। इस बीमारी में मसूड़ों से खून बहना, ढीला होना और दांतों का गिरना और इंट्रामस्क्युलर हेमरेज होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसकी कमी से कोलेजन और संयोजी ऊतक प्रोटीन का अनुचित संश्लेषण होता है।

viii. विटामिन डी: इसकी कमी से हड्डियों का विघटन होता है जो बच्चों में रिकेट्स और वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया का कारण बन सकता है।

ix. विटामिन ई: विटामिन ई की कमी से पशुओं में बाँझपन होता है और यह मानव में दुर्लभ है।

x. विटामिन के: मनुष्यों में विटामिन की कमी से रक्तस्रावी अभिव्यक्तियाँ होती हैं और यह रक्त के थक्के या जमाव में दोष का कारण बनता है।

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