आप शून्य तेल भोजन की सलाह क्यों देते हैं?

आप शून्य तेल भोजन की सलाह क्यों देते हैं?
हृदय रोग (कोरोनरी आर्टरी डिजीज) वर्तमान दुनिया में बहुत आम हो गई है। इस बीमारी के लिए विभिन्न जोखिम कारक हैं लेकिन सबसे आम है भोजन की आदतें और जीवनशैली। भारतीय संस्कृति में, भोजन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। त्यौहारों, समारोहों आदि के अवसर पर विशेष रूप से तेल और घी से बने विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों से भरपूर होते हैं। इस तरह के खाद्य पदार्थ कैलोरी की उच्च मात्रा को देते हैं। इस तरह के खाद्य पदार्थों के कारण अधिक वजन का सामना करना पड़ता है। जब अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ता है तो हमारे शरीर में वसा की मात्रा भी बढ़ती है और जैसा कि हम जानते हैं कि हमारे शरीर में वसा की मात्रा बढ़ती है और जैसा कि हम जानते हैं कि वसा को पचने में लंबा समय लगता है इसलिए यह हमारे शरीर में संग्रहीत होता है, जिससे मोटापा बढ़ता है। जब रक्त में वसा की अधिकता होती है तो यह धमनियों में बैठ जाती है और ब्लॉकेज पैदा करती है। इसलिए, जब शरीर में इतना वसा होता है तो हम भोजन में तेल की सलाह नहीं देते हैं और शून्य तेल भोजन पर जोर देते हैं ताकि धमनियों में रुकावट के रूप में जमा वसा शरीर में वसा की आवश्यकता को पूरा कर सके।

तेल हमारे दिल को कैसे प्रभावित करता है?
सभी तेल 100% वसा हैं और इन तेलों के मुख्य अवयव ट्राइग्लिसराइड्स हैं। हृदय रोग में, समस्या हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली नलियों के अंदर वसा के जमाव अथवा ब्लॉकेज की होती है। इनमें दो प्रकार की वसा ब्लॉकेज करती हैं, एक काॅलेस्ट्रॉल और दूसरी ट्राइग्लिसराइड है। जब हमारे भोजन में अधिक मात्रा में तेल लिया जाता है तो इससे हमारे रक्त में ट्राइग्लिसराॅइड्स का स्तर बढ़ जाता है। जब रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर एक विशेष स्तर (130mg/dl) से अधिक हो जाता है तो ब्लॉकेज अधिक बनती हैं। इस प्रकार सभी तेल हृदय के लिए खराब हैं और ब्लॉकेज की संभावना को बढ़ाते हैं।
आधुनिक मशीनीकृत समाज में संभावना अधिक बढ़ जाती है- जब हम शारीरिक व्यायाम को निरंतर काम करते जा रहे हैं। हमारा अधिकांश समय बैठने और निम्न-स्तर की शारीरिक गतिविधियों (टीवी देखना, कंप्यूटर पर काम करना, कार चलाना, टेलीफोन पर बात करना) में बिताता है – जो कि हमें अपने भोजन में लेने वाले तेल को पचाने में मदद नहीं करती हैं।